विकलांगों की बस्ती !

18 Oct
2009

fluorosis2 (1)१२ वर्ष का शम्भू कैमरे को देखकर पत्थर उठा लेता है, क्यूँ न उठाये वो पत्थर? सत्ता की शर्मनाक चुप्पी, प्रशासन की बदनीयती और जनप्रतिनिधियों की कफ़न खसोटी का असर कुछ तो होना था| गनीमत है कि अति नक्सल प्रभावित इस जनपद का रहने वाला अपाहिज शम्भू बन्दूक नहीं उठा रहा| सिर्फ शम्भू ही नहीं जिंदगी को घिसट-घिसट कर चलना सोनभद्र के उन हजारों, स्त्री, पुरुषों की नियति है जिन्हें फ्लोरोसिस का कहर तिल-तिल कर मार रहा है। जनपद में फ्लोरोसिस नियंत्रण को लेकर किये जा रहे तमाम सरकारी दावे थोथे साबित हुए हैं, नतीजा ये है की जनपद में विकलांगों की नयी बस्तियां तैयार हो रही हैं| जनपद के पडवा कोद्वारी, रोहनिया डामर, माधुरी, कुसुम्हा, रूहानिया डामर, गोबरदाहा, निरुहिया डामर, राजो, बिछियारी समेत सैकडों इलाकों में आपको मौत का इन्तजार करते चेहरे मिल जायेंगे|

नोट -ये रिपोर्ट सोनभद्र के फ्लोरोसिस प्रभावित गांवों में वृहद् सर्वेक्षण के बाद लिखी गयी है, इस रिपोर्ट के सम्बंध में कोई भी जानकारी लेखक आवेश तिवारी के सेलफोन 09838346828 पर ली जा सकती है|

पुरा रिपोर्ट-

http://hindi.indiawaterportal.org/content/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80

  • सोनभद्र में फ्लोरोसिस से भारी तबाही
  • कई गावों में बरसों से नहीं गूंजी शहनाई
  • नपुंसक बना रहा फ्लोराइड

Comment Form

top