विश्व के धरातल पर गंगामैया इतनी पवित्र नदी कोई अन्य दुसरी नही है । हजारों सालोंसे हम करोंडो भारतवासीयों को जीवनदान देनेवाली देवनदी गंगा निरंतर बह रही है । भारतीय प्रचिन सभ्यता के अनुरुप हम भारतवसी उनको गंगामैया, गंगाजी, गंगदेवी जैसे आदरणीय नमोंसे संबोधित करते है । इसलिये की वह हम सभी भारतवासीयोंकी जीवनरेखा है । गंगामैया के लहरों से प्राचिन भारतीय सभ्यता का निमार्ण तथा निरंतर विकस भी हूआ । गंगा के किनारों पर व्यास, वशिष्ठ, वाल्मिकी, जैसे महान मुनीवर तथा महाकवी कालीदास एवं संतशिरोमनी कबीर और महान राजनितीग्य चाणक्य पैदा हुये और गंगामैया के आचंल के छावतले फुले फले एवं वेदपुरण, रामायण, महाभारत तथा मेघदुत और कबीर के दोहो जैसे महाकाव्योंका निमार्ण किया । सम्राट चद्रगुप्त, सम्राट अशोक जैसे महापराक्रमी धीरवीर नरोशों की राजधानिंया इसी के किनारोंपर पुर्णरुपसे विकसीत हुई । गंगा के प्रेममयी शितल आचंलके छाव में फले बोधीव्रुक्ष के छावतले गौतम बुध्द् को ग्यान प्राप्त हूआ और वे भगवान बुध्द् हुये । हिन्दुंस्थानी सभ्यता की प्रगल्भता और शाक्तीमान्यता गंगामैया की देन है । निसंदेह विश्व के धरातल पर गंगामैया इतनी पवित्र, सुरम्य, शक्तिदायक नदी अन्य कही भी नही है. . . .
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